मुझे वह लमहा याद आता है जब मेरी डियुटी सर्वप्रथम ए0एस0पी0 मिश्रा जी आई0पी0एस0 के यहाँ बैडमेंटन मैदान बनाने में लगी । हम दो लोग उनके निवास पर पहुँचे तो देखा कि उनके निवास पर बाबडी लगी है जिसके अंदर खेती युक्त जमीन है तथा निवास बना है उसी खेती की जमीन में खेल मैदान बनना है । घूम रहे सज्जन ने बताया जो फटी हुई बनियान एवं पैजामा में थे । हम दोनो उन सज्जन से बातें करने लगे कि यह कैसे अधिकारी है कि खेत में खेल मैदान बनाना चाहते है जबकि यह जमीन इस लायक है ही नही तथा तरह्तरह की बातें उन से करते रहे, वह सज्जन कुछ समय बाद अंदर चले गये तथा उसी निवास से हमारे बैच का बंदा निकला जिससे हम लोगों ने पूँछा साहब कहाँ है । तो उसने जबाब दिया जो अभी तुम्हारे साथ थे वही तो है । हम यह सुनते ही , हमारे पैरों के नीचे से जमीन खिसक ग ई । चूँकि हम दोनो उनसे अंजाने में बहुत सारी बुरी भली बातें कर चुके थे । तभी साहब मुस्कराते हुये निवास से निकले जो बनियान की जगह टी सर्ट पहने थे बोले क्यों तुम लोग क्या समझते थे कि ए0एस0पी0 बुड्ढा होगा ? यह सुनते ही हमारे होश उड़ गये। हम दोनो पसीना-पसीना हो गये, हमारे पास उनसे कहने को कुछ नहीं था। चूँकि अंजाने में काफी कुछ बोल चुके थे। वह बोले ठीक है यदि यह जगह इस लायक नही है तो कोई बात नही । वह भी पहली पोस्टिग में आये थे उन्होंने अपनी और हमारी जानकारी आपस में बाँटी । अब हमारी उनसे अच्छी परिचय हो चुकी थी। बुहत अच्छे इंसान है । उनकी जगह यदि कोई अन्य अधिकारी होता तो अनुशासनहीनता बरतने का आरोप लगाकर हम लोगों का कुछ भी बुरा कर सकता था । बहुत ही ईमानदार एवं दरियादिल इंसान है। हम ता-जिंदगी याद रखेंगे उन्हें ।