एक प्रसंग ऐसा भी आया, जिसने मुझे लज्जित कर दिया । मुझे स्मरण आता है वह वाकिया जब मैं प्रशिक्षित होकर अपनी यूनिट में नया-नया आया था । प्रत्येक शुक्रवार एवं मंगलवार को जनरल परेड होती थी, हमारी पोसाक में इंकलेट तथा टर्न आउट का विशेष महत्व था। मैं हमेशा वर्दी के मामले में उदासीन रहता था तथा एक वर्दी काफी समय तक चलाता था । शुक्रवार के दिन परेड की सलामी लेने पुलिस अधीक्षक महोदय श्री सर्वजीत सिंह जी पधारे, सलामी के बाद निरीक्षण होता है साहब मेरे पास आकर रुक गये तथा मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोले वेस्ट टर्न आउट । मैं स्तब्ध रह गया , क्योंकि मेरा टर्न आउट सबसे गंदा था । मेरे जीवन में इसका प्रभाव ऐसा पडा कि मैने उसी समय साफ सुथरी पोसाकें तैयार करायीं । साहब का आश्चर्यचकित व्यवहार मेरे जीवन में नूतन उमंग लेकर आया और मैं उसी दिन से साफ सुथरी पोसाक पहनने लगा । साहब की जगह यदि कोई और अधिकारी होता तो निश्चय ही दण्ड से दंडित कर देता । जब भी मुझे वह पल याद आता है मैं अपने आपको लज्जित महसूस करता हूँ ।